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mahabharat 12.26.24: इस प्रसंग में यज्ञ में पुरोहितों द्वारा गायी जाने वाली एक कथा है, जो तीनों वेदों पर आधारित है। वह कथा संसार में यज्ञ की प्रतिष्ठा स्थापित करती है। प्राचीन बातों को जानने वाले लोग ऐसे अवसरों पर उसे दोहराते हैं।॥24॥   |   mahabharat अध्याय 12.26: युधिष्ठिरके द्वारा धनके त्यागकी ही महत्ताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 26: युधिष्ठिरके द्वारा धनके त्यागकी ही महत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.26.24 
अत्र गाथां यज्ञगीतां कीर्तयन्ति पुराविद:।
त्रयीमुपाश्रितां लोके यज्ञसंस्तरकारिकाम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रसंग में यज्ञ में पुरोहितों द्वारा गायी जाने वाली एक कथा है, जो तीनों वेदों पर आधारित है। वह कथा संसार में यज्ञ की प्रतिष्ठा स्थापित करती है। प्राचीन बातों को जानने वाले लोग ऐसे अवसरों पर उसे दोहराते हैं।॥24॥
 
‘In this context, there is a story sung by the priests in the yajna which is based on the three Vedas. That story establishes the prestige of the yajna in the world. People who know the old things repeat it on such occasions.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)