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mahabharat 12.26.19: मैं यह स्पष्ट रूप से देख रहा हूँ और आप भी देख सकते हैं कि जो लोग धन कमाने में लगे हुए हैं, उनके लिए अवांछनीय गतिविधियों को छोड़ना बहुत कठिन होता जा रहा है।   |   mahabharat अध्याय 12.26: युधिष्ठिरके द्वारा धनके त्यागकी ही महत्ताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 26: युधिष्ठिरके द्वारा धनके त्यागकी ही महत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.26.19 
प्रत्यक्षमनुपश्यामि त्वमपि द्रष्टुमर्हसि।
वर्जनं वर्जनीयानामीहमानेन दुष्करम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
मैं यह स्पष्ट रूप से देख रहा हूँ और आप भी देख सकते हैं कि जो लोग धन कमाने में लगे हुए हैं, उनके लिए अवांछनीय गतिविधियों को छोड़ना बहुत कठिन होता जा रहा है।
 
'I am seeing it clearly and you can also see it, it is becoming very difficult for those who are engaged in earning money to give up undesirable activities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)