श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 26: युधिष्ठिरके द्वारा धनके त्यागकी ही महत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.26.14 
यदा चायं न बिभेति यदाचास्मान्न बिभ्यति।
यदा नेच्छति न द्वेष्टि ब्रह्म सम्पद्यते तदा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजा ययाति ने कहा था, 'जब यह पुरुष किसी से नहीं डरता, जब कोई इससे भयभीत नहीं होता तथा जब यह न किसी से प्रेम करता है और न किसी से द्वेष करता है, तब यह ब्रह्मपद को प्राप्त होता है॥ 14॥
 
King Yayati had said, 'When this man is not afraid of anyone, when no one is afraid of him and when he neither loves anyone nor has hatred for anyone, then he attains the state of Brahma.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)