Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.26.13: इस संदर्भ में लोग राजा ययाति द्वारा गाये गए इन श्लोकों को उदाहरण के रूप में उद्धृत करते हैं। जिनके द्वारा मनुष्य अपनी समस्त इच्छाओं को उसी प्रकार समेट सकता है, जैसे कछुआ अपने अंगों को सब ओर से समेट लेता है॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.26: युधिष्ठिरके द्वारा धनके त्यागकी ही महत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस संदर्भ में लोग राजा ययाति द्वारा गाये गए इन श्लोकों को उदाहरण के रूप में उद्धृत करते हैं। जिनके द्वारा मनुष्य अपनी समस्त इच्छाओं को उसी प्रकार समेट सकता है, जैसे कछुआ अपने अंगों को सब ओर से समेट लेता है॥13॥
In this context, people quote these verses sung by King Yayati as examples. With the help of which a man can gather all his desires in the same way as a tortoise withdraws its limbs from all sides.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥