श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 26: युधिष्ठिरके द्वारा धनके त्यागकी ही महत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.26.1 
वैशम्पायन उवाच
अस्मिन्नेव प्रकरणे धनंजयमुदारधी:।
अभिनीततरं वाक्यमित्युवाच युधिष्ठिर:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय । इस प्रसंग में महाप्रतापी राजा युधिष्ठिर ने अर्जुन से यह युक्तिसंगत बात कही थी ॥1॥
 
Vaishmpayana says- Janamejaya. In this context, the magnanimous king Yudhishthira said this logical thing to Arjun. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)