अभीत: शुचिरभ्येति राजद्वारमशङ्कित:।
न हि दुश्चरितं किंचिदन्तरात्मनि पश्यति॥ ९॥
अनुवाद
जो शुद्ध पुरुष है, जिसमें चोरी आदि पाप नहीं हैं, वह राजा के द्वार पर निर्भय होकर और बिना किसी संशय के जाता है, क्योंकि वह अपने अन्तःकरण में कोई पाप नहीं देखता।॥9॥
A man who is pure, who has no sins like theft etc., goes to the king's doorstep fearlessly and without any doubts because he does not see any wrongdoing in his conscience.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥