श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.259.3 
भीष्म उवाच
सदाचार: स्मृतिर्वेदास्त्रिविधं धर्मलक्षणम्।
चतुर्थमर्थमित्याहु: कवयो धर्मलक्षणम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - युधिष्ठिर! वेद, स्मृति और सदाचार - ये तीन ही धर्म के स्वरूप के द्योतक हैं। कुछ विद्वान अर्थ को भी धर्म का चौथा लक्षण मानते हैं।॥3॥
 
Bhishmaji says - Yudhishthira! Vedas, memory and good conduct - these three are the ones that indicate the nature of religion. Some scholars also consider meaning as the fourth characteristic of religion.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)