श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.259.27 
धर्मलक्षणमाख्यातमेतत् ते कुरुसत्तम।
तस्मादनार्जवे बुद्धिर्न ते कार्या कथंचन॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! मैंने तुम्हें धर्म का यह लक्षण बताया है; इसलिए तुम्हें अपनी बुद्धि को किसी कुटिल मार्ग में नहीं ले जाना चाहिए ॥27॥
 
O best of the Kurus! I have told you this characteristic of Dharma; therefore you should not lead your intellect in any crooked path. ॥27॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि धर्मलक्षणे एकोनषष्टॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २५९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें धर्मका लक्षणविषयक दो सौ उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)