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mahabharat 12.259.26: विधाता ने पूर्वकाल में पुण्यात्मा पुरुषों के लिए जो उत्तम आचरण निर्धारित किया है, वह जगत् के कल्याण की भावना से युक्त है और धर्म तथा अर्थ के सूक्ष्म स्वरूप का ज्ञान कराने वाला है।॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 12.259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.259.26 
लोकसंग्रहसंयुक्तं विधात्रा विहितं पुरा।
सूक्ष्मधर्मार्थनियतं सतां चरितमुत्तमम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
विधाता ने पूर्वकाल में पुण्यात्मा पुरुषों के लिए जो उत्तम आचरण निर्धारित किया है, वह जगत् के कल्याण की भावना से युक्त है और धर्म तथा अर्थ के सूक्ष्म स्वरूप का ज्ञान कराने वाला है।॥ 26॥
 
The good conduct which the Creator has prescribed for virtuous people in the past is imbued with the feeling of welfare of the world and it gives the knowledge of the subtle form of Dharma and Artha.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)