श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.259.24 
यस्मिंस्तु देवा: समये संतिष्ठेरंस्तथा भवेत्।
अथवा लाभसमये स्थितिर्धर्मेऽपि शोभना॥ २४॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को भी उसी धर्ममार्ग या आचार संहिता पर दृढ़ रहना चाहिए जिस पर देवता खड़े हैं, अथवा धनलाभ के समय भी धर्म में दृढ़ रहना अच्छा है ॥24॥
 
Man should also remain steadfast on the same righteous path or code of conduct on which the gods stand, or it is also good to remain steadfast in Dharma at the time of monetary gain. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)