यदा नियतिकार्पण्यमथैषामेव रोचते।
न ह्यत्यन्तं धनवन्तो भवन्ति सुखिनोऽपि वा॥ १९॥
अनुवाद
परंतु यदि संयोगवश वे भी दरिद्र हो जाएँ या भिखारी हो जाएँ, तो भी उन्हें यही धर्म श्रेष्ठ जान पड़ता है; क्योंकि न तो कोई कभी अति धनवान होता है और न अति सुखी (अतः धन का अभिमान नहीं करना चाहिए)॥19॥
But if by chance they too become poor or become beggars, then even they find this Dharma to be the best; because no one is ever extremely rich or extremely happy (so one should not be proud of one's wealth).॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥