Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.259.15: जो किसी को कष्ट नहीं देता, उसे दुष्टों, चोरों या राजा का भय नहीं रहता। शुद्ध आचरण और विचारों वाला मनुष्य सदैव निर्भय रहता है॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.259.15 
असाधुभ्योऽस्य न भयं न चौरेभ्यो न राजत:।
अकिंचित् कस्यचित् कुर्वन् निर्भय: शुचिरावसेत् ॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो किसी को कष्ट नहीं देता, उसे दुष्टों, चोरों या राजा का भय नहीं रहता। शुद्ध आचरण और विचारों वाला मनुष्य सदैव निर्भय रहता है॥15॥
 
He who does not harm anyone has no fear of wicked people, thieves or the king. A man with pure conduct and thoughts is always fearless.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)