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mahabharat 12.259.14: इस संसार में न तो कोई बहुत बलवान है और न ही कोई बहुत सुखी है। इसलिए अपने मन में कभी कुटिलता का विचार नहीं लाना चाहिए। 14॥   |   mahabharat अध्याय 12.259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 259: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.259.14 
न ह्यत्यन्तं बलवन्तो भवन्ति सुखिनोऽपि वा।
तस्मादनार्जवे बुद्धिर्न कार्या ते कदाचन॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में न तो कोई बहुत बलवान है और न ही कोई बहुत सुखी है। इसलिए अपने मन में कभी कुटिलता का विचार नहीं लाना चाहिए। 14॥
 
No one in this world is either very strong or very happy. That's why you should never bring the thought of crookedness into your mind. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)