Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.258.7: हे वर देने वाले प्रभु! देव! मैंने सुना है कि पापी प्राणियों को यमराज के लोक में डाल दिया जाता है, अतः मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप प्रसन्न होकर मुझ पर दया करें। | mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यमस्य भवने देव पात्यन्ते पापकर्मिण:।
प्रसादये त्वां वरद प्रसादं कुरु मे प्रभो॥ ७॥
अनुवाद
हे वर देने वाले प्रभु! देव! मैंने सुना है कि पापी प्राणियों को यमराज के लोक में डाल दिया जाता है, अतः मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप प्रसन्न होकर मुझ पर दया करें।
'O boon-giving Lord! Dev! I have heard that sinful beings are thrown into the world of Yamraj, so I pray to you to be pleased, please have mercy on me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥