Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.258.42: इस प्रकार ब्रह्माजी ने स्वयं ही जीवों की मृत्यु की रचना की है। वह मृत्यु, उचित समय आने पर, जीवों को उचित रीति से मारती है। मृत्यु का समय आने पर उनके द्वारा बहाए गए आँसू, रोगों में परिवर्तित होकर इस संसार के जीवों का संहार करते हैं॥ 42॥ | mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार ब्रह्माजी ने स्वयं ही जीवों की मृत्यु की रचना की है। वह मृत्यु, उचित समय आने पर, जीवों को उचित रीति से मारती है। मृत्यु का समय आने पर उनके द्वारा बहाए गए आँसू, रोगों में परिवर्तित होकर इस संसार के जीवों का संहार करते हैं॥ 42॥
In this way, Brahmaji himself has created the death of living beings. That death, when the right time comes, kills living beings in the proper way. The tears that he shed, when the time of death comes, turn into diseases and kill the living beings of this world.॥ 42॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि मृत्युप्रजापतिसंवादे अष्टपञ्चाशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २५८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें मृत्यु और प्रजापतिका संवादविषयक दो सौ अट्ठावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥