Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.258.41: जब सभी देवताओं के पुण्य क्षीण हो जाते हैं, तो वे इस लोक में आकर मरणधर्मा नाम से विभूषित होते हैं और सभी नश्वर मनुष्य पुण्य के प्रभाव से मृत्यु के बाद दिव्य नाम से युक्त हो जाते हैं। अतः राजसिंह! तुम अपने पुत्र के लिए शोक करो। तुम्हारा पुत्र स्वर्ग में सुख भोग रहा है। | mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वे देवा मर्त्यसंज्ञाविशिष्टा:
सर्वे मर्त्या देवसंज्ञाविशिष्टा:।
तस्मात् पुत्रं मा शुचो राजसिंह
पुत्र: स्वर्गं प्राप्य ते मोदते ह॥ ४१॥
अनुवाद
जब सभी देवताओं के पुण्य क्षीण हो जाते हैं, तो वे इस लोक में आकर मरणधर्मा नाम से विभूषित होते हैं और सभी नश्वर मनुष्य पुण्य के प्रभाव से मृत्यु के बाद दिव्य नाम से युक्त हो जाते हैं। अतः राजसिंह! तुम अपने पुत्र के लिए शोक करो। तुम्हारा पुत्र स्वर्ग में सुख भोग रहा है।
When all the gods' virtues wane, they come to this world and are adorned with the name Maranadharma and all the mortal humans are united with the divine name after death due to the influence of virtues. So Raj Singh! You mourn for your son. Your son is enjoying happiness in heaven.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥