Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.258.38: मृत्यु से पहले जो आँसू गिरे, वे ज्वर आदि रोग बन गए, जिनसे मनुष्य का शरीर रोगी हो जाता है। वह मृत्यु सभी जीवों की आयु समाप्त होने पर आती है। इसलिए हे राजन! आप अपने पुत्र के लिए शोक न करें। इस बात को बुद्धि से समझें। 38   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.258.38 
मृत्योर्ये ते व्याधयश्चाश्रुपाता
मनुष्याणां रुज्यते यै: शरीरम्।
सर्वेषां वै प्राणिनां प्राणानान्ते
तस्माच्छोकं मा कृथा बुद्धॺ बुद्धॺा॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
मृत्यु से पहले जो आँसू गिरे, वे ज्वर आदि रोग बन गए, जिनसे मनुष्य का शरीर रोगी हो जाता है। वह मृत्यु सभी जीवों की आयु समाप्त होने पर आती है। इसलिए हे राजन! आप अपने पुत्र के लिए शोक न करें। इस बात को बुद्धि से समझें। 38
 
The tears that fell before death became diseases like fever etc., due to which the human body becomes sick. That death comes to all living beings when their life span ends. Therefore, O King! Do not grieve for your son. Understand this matter with wisdom. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)