Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.258.36: इस प्रकार तुम धर्म का पालन करोगे और पाप में नहीं डूबोगे; इसलिए जो अधिकार तुम्हें मिला है, उसे प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करो और इसी कार्य में लगकर इस जगत के प्राणियों का संहार करो। ॥36॥ | mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं धर्मं पालयिष्यस्यथो त्वं
न चात्मानं मज्जयिष्यस्यधर्मे।
तस्मात् कामं रोचयाभ्यागतं त्वं
संयोज्याथो संहरस्वेह जन्तून्॥ ३६॥
अनुवाद
इस प्रकार तुम धर्म का पालन करोगे और पाप में नहीं डूबोगे; इसलिए जो अधिकार तुम्हें मिला है, उसे प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करो और इसी कार्य में लगकर इस जगत के प्राणियों का संहार करो। ॥36॥
"In this way you will follow Dharma and will not immerse yourself in sin; therefore accept happily this right that has come to you and by devoting yourself to this task kill the creatures of this world." ॥36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥