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mahabharat 12.258.32: महाराज! ब्रह्माजी के ऐसा कहने पर मृत्यु ने हाथ जोड़कर अविनाशी महात्मा देवेश्वर ब्रह्मा से इस प्रकार कहा - 'प्रभो! मैं जीवों को नहीं मारूँगी।'   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.258.32 
सैवमुक्ता महाराज कृताञ्जलिरुवाच ह।
पुनरेव महात्मानं नेति देवेशमव्ययम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ब्रह्माजी के ऐसा कहने पर मृत्यु ने हाथ जोड़कर अविनाशी महात्मा देवेश्वर ब्रह्मा से इस प्रकार कहा - 'प्रभो! मैं जीवों को नहीं मारूँगी।'
 
Maharaj! After Brahmaji said this, Death folded her hands and said to the immortal Mahatma Deveshwar Brahma in this way - 'Lord! I will not kill living beings.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)