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mahabharat 12.258.27: संसार के पापों से भयभीत होकर पुनः दया की याचना करती हुई मृत्यु को देवताओं के स्वामी ब्रह्मा ने रोक लिया और उससे यह कहा ॥27॥   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.258.27 
तामधर्मभयाद् भीतां पुनरेव प्रयाचतीम्।
तदाब्रवीद् देवदेवो निगृह्येदं वचस्तत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
संसार के पापों से भयभीत होकर पुनः दया की याचना करती हुई मृत्यु को देवताओं के स्वामी ब्रह्मा ने रोक लिया और उससे यह कहा ॥27॥
 
Fearing the sins of the world and once again begging for mercy, Death was stopped by Brahma, the Lord of all Gods, and he said this to her: ॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)