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mahabharat 12.258.21-22h: हे महाराज! तत्पश्चात वह कन्या कौशिकी नदी के तट पर गई और वहाँ वायु-जल ग्रहण करके पुनः कठोर नियमों का पालन करने लगी।   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  12.258.21-22h 
ततो जगाम सा कन्या कौशिकीं नृपसत्तम॥ २१॥
तत्र वायुजलाहारा चचार नियमं पुन:।
 
 
अनुवाद
हे महाराज! तत्पश्चात वह कन्या कौशिकी नदी के तट पर गई और वहाँ वायु-जल ग्रहण करके पुनः कठोर नियमों का पालन करने लगी।
 
O great king! Thereafter the girl went to the bank of the river Kaushiki. There she again followed the strict rules after consuming air and water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)