Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.258.2: हे वक्ताओं में श्रेष्ठ प्रजापति! (यदि आपको मुझसे क्रूर कर्म ही करवाना था, तो) आपने मुझ जैसी कोमल हृदय वाली स्त्री क्यों उत्पन्न की? क्या मेरे समान स्त्री समस्त प्राणियों के लिए भयंकर और क्रूर कर्म कर सकती है?॥2॥ | mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वया सृष्टा कथं नारी मादृशी वदतां वर।
रौद्रकर्माभिजायेत सर्वप्राणिभयङ्करी॥ २॥
अनुवाद
हे वक्ताओं में श्रेष्ठ प्रजापति! (यदि आपको मुझसे क्रूर कर्म ही करवाना था, तो) आपने मुझ जैसी कोमल हृदय वाली स्त्री क्यों उत्पन्न की? क्या मेरे समान स्त्री समस्त प्राणियों के लिए भयंकर और क्रूर कर्म कर सकती है?॥2॥
'O Prajapati, the best of speakers! (If you had to make me do cruel deeds, then) why did you create a soft-hearted woman like me? Can a woman like me do terrible and cruel deeds for all creatures?॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥