Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.258.18-19h: मृत्यु! तुम मेरी आज्ञा का पालन करो।’ दूसरों को आदर देने वाले पिता! उनकी बात का अनादर न करके मृत्यु ने तत्काल ही पुनः एक पैर पर खड़े होकर अगले पच्चीस सौ वर्षों तक तपस्या आरम्भ कर दी। 18 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  12.258.18-19h 
कुरुष्व मे वचो मृत्यो तदनादृत्य सत्वरा।
तथैवैकपदे तात पुनरन्यानि सप्त सा॥ १८॥
तस्थौ पद्मानि षट् चैव पञ्च द्वे चैव मानद।
 
 
अनुवाद
मृत्यु! तुम मेरी आज्ञा का पालन करो।’ दूसरों को आदर देने वाले पिता! उनकी बात का अनादर न करके मृत्यु ने तत्काल ही पुनः एक पैर पर खड़े होकर अगले पच्चीस सौ वर्षों तक तपस्या आरम्भ कर दी। 18 1/2॥
 
'Death! You follow my orders.' Father who gives respect to others! Not respecting his statement, death immediately started penance by standing on one foot again for the next twenty five hundred years. 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)