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mahabharat 12.258.17: इस प्रकार वहाँ अत्यन्त कठिन तपस्या करके मृत्यु से भी अधिक तेजस्वी ब्रह्माजी वापस चले गये और उन्होंने यह कहा -   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.258.17 
तां तथा कुर्वतीं तत्र तप: परमदुश्चरम्।
पुनरेव महातेजा ब्रह्मा वचनमब्रवीत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वहाँ अत्यन्त कठिन तपस्या करके मृत्यु से भी अधिक तेजस्वी ब्रह्माजी वापस चले गये और उन्होंने यह कहा -
 
Having thus performed extremely difficult austerities there, Brahma, the more glorious than death, went back and said this -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)