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mahabharat 12.258.16: वहाँ मृत्यु की देवी ने अत्यन्त कठिन एवं महान तपस्या की। वे पन्द्रह पद्म वर्षों तक एक पैर पर खड़ी रहीं।   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.258.16 
सा तत्र परमं देवी तपोऽचरद् दुश्चरम्।
समा ह्येकपदे तस्थौ दश पद्मानि पञ्च च॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ मृत्यु की देवी ने अत्यन्त कठिन एवं महान तपस्या की। वे पन्द्रह पद्म वर्षों तक एक पैर पर खड़ी रहीं।
 
There the Goddess of Death performed a very difficult and great penance. She stood on one leg for fifteen Padma years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)