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mahabharat 12.258.15: राजा ! उस समय मृत्यु प्रजा को मारने की प्रतिज्ञा किए बिना ही वहाँ से चली गई और बड़ी शीघ्रता से धेनुकाश्रम में पहुँची ॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.258.15 
अपसृत्याप्रतिश्रुत्य प्रजासंहरणं तदा।
त्वरमाणेव राजेन्द्र मृत्युर्धेनुकमभ्यगात्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
राजा ! उस समय मृत्यु प्रजा को मारने की प्रतिज्ञा किए बिना ही वहाँ से चली गई और बड़ी शीघ्रता से धेनुकाश्रम में पहुँची ॥ 15॥
 
King! At that time Death left the place without making any promise of killing the people and in great haste reached Dhenukashram.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)