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mahabharat 12.258.14: हमने सुना है कि जब अपराजित ब्रह्माजी का क्रोध शांत हो गया तो वह कन्या भी उनसे दूर चली गई ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.258.14 
निवृत्तरोषे तस्मिंस्तु भगवत्यपराजिते।
सा कन्याथ जगामास्य समीपादिति न: श्रुतम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हमने सुना है कि जब अपराजित ब्रह्माजी का क्रोध शांत हो गया तो वह कन्या भी उनसे दूर चली गई ॥14॥
 
We have heard that after the anger of the undefeated Lord Brahma had subsided that girl also went away from him. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)