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mahabharat 12.258.11: महाबाहो! हे शत्रु नगर को जीतने वाले राजा! ब्रह्माजी के ऐसा कहने पर मृत्यु हाथ जोड़कर उनके सामने खड़ी हो गई - कुछ भी कहने में असमर्थ।   |   mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.258.11 
एवमुक्ता महाबाहो मृत्यु: परपुरंजय।
न व्याजहार तस्थौ च प्रह्वा भगवदुन्मुखी॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! हे शत्रु नगर को जीतने वाले राजा! ब्रह्माजी के ऐसा कहने पर मृत्यु हाथ जोड़कर उनके सामने खड़ी हो गई - कुछ भी कहने में असमर्थ।
 
Mahabaho! O king who has conquered the enemy city! When Brahmaji said this, Death stood facing him with folded hands - unable to say anything.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)