Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.258.10: ऐसा तो अवश्य ही होगा। इसमें कोई परिवर्तन नहीं हो सकता। हे निर्दोष अंगों वाली देवी! मैंने जो कहा है, उसका पालन करो। ऐसा करने से तुम्हें कोई पाप नहीं लगेगा।॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.258: मृत्युकी घोर तपस्या और प्रजापतिकी आज्ञासे उसका प्राणियोंके संहारका कार्य स्वीकार करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतदेवमवश्यं हि भविता नैतदन्यथा।
क्रियतामनवद्याङ्गि यथोक्तं मद्वचोऽनघे॥ १०॥
अनुवाद
ऐसा तो अवश्य ही होगा। इसमें कोई परिवर्तन नहीं हो सकता। हे निर्दोष अंगों वाली देवी! मैंने जो कहा है, उसका पालन करो। ऐसा करने से तुम्हें कोई पाप नहीं लगेगा।॥10॥
This is definitely going to happen this way. There can be no change in this. O Goddess with flawless body parts! Follow what I have told you. You will not commit any sin by doing this.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥