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mahabharat 12.257.5: जब बहुत सोचने पर भी मैं इस बढ़ी हुई जनसंख्या को मारने का कोई उपाय न पा सका, तब मुझे क्रोध आ गया ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.257: महादेवजीकी प्रार्थनासे ब्रह्माजीके द्वारा अपनी रोषाग्निका उपसंहार तथा मृत्युकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 257: महादेवजीकी प्रार्थनासे ब्रह्माजीके द्वारा अपनी रोषाग्निका उपसंहार तथा मृत्युकी उत्पत्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.257.5 
यदाहं नाधिगच्छामि बुद्धॺा बहु विचारयन्।
संहारमासां वृद्धानां ततो मां क्रोध आविशत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब बहुत सोचने पर भी मैं इस बढ़ी हुई जनसंख्या को मारने का कोई उपाय न पा सका, तब मुझे क्रोध आ गया ॥5॥
 
When, even after much thought, I could not find any means to kill this multiplied population, I became angry. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)