Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.257.3: प्रजापति ब्रह्माजी ने कहा- शिवे! मैं प्रजा पर क्रोधित नहीं हूँ, न ही मैं चाहता हूँ कि प्रजा का विनाश हो। पृथ्वी का भार हल्का करने के लिए ही प्रजा का विनाश आवश्यक प्रतीत होता है। | mahabharat अध्याय 12.257: महादेवजीकी प्रार्थनासे ब्रह्माजीके द्वारा अपनी रोषाग्निका उपसंहार तथा मृत्युकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रजापतिरुवाच
न कुप्ये न च मे कामो न भवेयु: प्रजा इति।
लाघवार्थं धरण्यास्तु तत: संहार इष्यते॥ ३॥
अनुवाद
प्रजापति ब्रह्माजी ने कहा- शिवे! मैं प्रजा पर क्रोधित नहीं हूँ, न ही मैं चाहता हूँ कि प्रजा का विनाश हो। पृथ्वी का भार हल्का करने के लिए ही प्रजा का विनाश आवश्यक प्रतीत होता है।
Prajapati Brahmaji said- Shiva! I am not angry with the people, nor do I wish that the people be destroyed. The destruction of the people seems necessary only to lighten the burden on the earth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥