Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.257.2: हे देव! हे जगत के स्वामी! आज समस्त प्रजा आपके क्रोध की अग्नि में जल रही है। उन्हें उस दशा में देखकर मुझे दया आ रही है, कृपया आप उन पर क्रोध न करें॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 12.257: महादेवजीकी प्रार्थनासे ब्रह्माजीके द्वारा अपनी रोषाग्निका उपसंहार तथा मृत्युकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तव तेजोऽग्निना देव प्रजा दह्यन्ति सर्वश:।
ता दृष्ट्वा मम कारुण्यं मा कुप्यासां जगत्प्रभो॥ २॥
अनुवाद
हे देव! हे जगत के स्वामी! आज समस्त प्रजा आपके क्रोध की अग्नि में जल रही है। उन्हें उस दशा में देखकर मुझे दया आ रही है, कृपया आप उन पर क्रोध न करें॥ 2॥
O God! O Lord of the world! Today all the people are burning in the fire of your anger. I feel pity on seeing them in that condition, please do not be angry with them.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥