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mahabharat 12.257.15: क्रोध की अग्नि को बुझाते समय महात्मा ब्रह्माजी की समस्त इन्द्रियों से एक स्त्री के समान मूर्ति प्रकट हुई॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.257: महादेवजीकी प्रार्थनासे ब्रह्माजीके द्वारा अपनी रोषाग्निका उपसंहार तथा मृत्युकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 257: महादेवजीकी प्रार्थनासे ब्रह्माजीके द्वारा अपनी रोषाग्निका उपसंहार तथा मृत्युकी उत्पत्ति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.257.15 
उपसंहरतस्तस्य तमग्निं रोषजं तदा।
प्रादुर्बभूव विश्वेभ्य: खेभ्यो नारी महात्मन:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
क्रोध की अग्नि को बुझाते समय महात्मा ब्रह्माजी की समस्त इन्द्रियों से एक स्त्री के समान मूर्ति प्रकट हुई॥15॥
 
While extinguishing the fire of anger, an idol like woman appeared from all the senses of Mahatma Brahmaji. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)