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mahabharat 12.257.1: महादेवजी बोले- प्रभु! पितामह! मेरी इच्छा या उद्देश्य प्रजा की रक्षा के लिए आपसे प्रार्थना करना है। आपको यह जानना चाहिए। आपने ही इन प्रजाओं को उत्पन्न किया है, अतः आपको इन पर क्रोध नहीं करना चाहिए॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.257: महादेवजीकी प्रार्थनासे ब्रह्माजीके द्वारा अपनी रोषाग्निका उपसंहार तथा मृत्युकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 257: महादेवजीकी प्रार्थनासे ब्रह्माजीके द्वारा अपनी रोषाग्निका उपसंहार तथा मृत्युकी उत्पत्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.257.1 
स्थाणुरुवाच
प्रजासर्गनिमित्तं मे कार्यवत्तामिमां प्रभो।
विद्धि सृष्टास्त्वया हीमा मा कुप्यासां पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
महादेवजी बोले- प्रभु! पितामह! मेरी इच्छा या उद्देश्य प्रजा की रक्षा के लिए आपसे प्रार्थना करना है। आपको यह जानना चाहिए। आपने ही इन प्रजाओं को उत्पन्न किया है, अतः आपको इन पर क्रोध नहीं करना चाहिए॥1॥
 
Mahadevji said-Prabhu! Grandfather! My desire or purpose is to pray to you for the protection of the people. You should know this. You have created these people; hence, you should not get angry with them.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)