Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.256.4: परन्तु इस समय ये अत्यन्त बुद्धिमान भूपाल प्राणहीन पड़े हैं। इनके प्राण निकल जाने पर इन्हें मृत माना जाता है; अर्थात् ऐसा कहा जाता है कि 'ये मर गए हैं'॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथ चेमे महाप्राज्ञा: शेरते हि गतासव:।
मृता इति च शब्दोऽयं वर्तत्येषु गतासुषु॥ ४॥
अनुवाद
परन्तु इस समय ये अत्यन्त बुद्धिमान भूपाल प्राणहीन पड़े हैं। इनके प्राण निकल जाने पर इन्हें मृत माना जाता है; अर्थात् ऐसा कहा जाता है कि 'ये मर गए हैं'॥4॥
But at this time this very intelligent Bhupal is lying lifeless. When their life is gone, they are treated as dead; That is, it is said that ‘he is dead’. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥