Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.256.21: शम्भु! मैं तुम्हें वर पाने के योग्य समझता हूँ। बताओ, आज मैं तुम्हारी कौन-सी इच्छा पूरी करूँ? तुम्हारे हृदय की जो भी प्रियतम इच्छा होगी, मैं उसे पूरा करूँगा।॥21॥ | mahabharat अध्याय 12.256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शम्भु! मैं तुम्हें वर पाने के योग्य समझता हूँ। बताओ, आज मैं तुम्हारी कौन-सी इच्छा पूरी करूँ? तुम्हारे हृदय की जो भी प्रियतम इच्छा होगी, मैं उसे पूरा करूँगा।॥21॥
‘Shambhu! I consider you worthy of receiving a boon. Tell me, which of your wishes should I fulfill today? Whatever is the dearest desire of your heart, I will fulfill it.’॥ 21॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि मृत्युप्रजापतिसंवादोपक्रमे षट्पञ्चाशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २५६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें मृत्यु और प्रजापतिके संवादका उपक्रमविषयक दो सौ छप्पनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥