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mahabharat 12.256.19: तब जिनके केश यज्ञ हैं और जो वेदों और यज्ञों के रक्षक हैं, वे शत्रुवीरों का नाश करने वाले कल्याणकारी भगवान शिव ब्रह्मा की शरण में गए॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.256.19 
ततोऽध्वरजट: स्थाणुर्वेदाध्वरपति: शिव:।
जगाम शरणं देवो ब्रह्माणं परवीरहा॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तब जिनके केश यज्ञ हैं और जो वेदों और यज्ञों के रक्षक हैं, वे शत्रुवीरों का नाश करने वाले कल्याणकारी भगवान शिव ब्रह्मा की शरण में गए॥19॥
 
Then those whose hair is Yagya and who is the protector of Vedas and Yagya, they took refuge in Lord Shiva Brahma, the benevolent one who destroys the enemy heroes. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)