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mahabharat 12.256.16: महाराज! उस समय क्रोध के कारण ब्रह्माजी के नेत्रों और इन्द्रियों से अग्नि प्रकट हुई। राजन! उस अग्नि से पितामह ने सम्पूर्ण दिशाओं को जलाना आरम्भ कर दिया। 16॥   |   mahabharat अध्याय 12.256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.256.16 
तस्य रोषान्महाराज खेभ्योऽग्निरुदतिष्ठत।
तेन सर्वा दिशो राजन् ददाह स पितामह:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय क्रोध के कारण ब्रह्माजी के नेत्रों और इन्द्रियों से अग्नि प्रकट हुई। राजन! उस अग्नि से पितामह ने सम्पूर्ण दिशाओं को जलाना आरम्भ कर दिया। 16॥
 
Maharaj! At that time, due to anger, fire appeared from Brahmaji's eyes and sense organs. Rajan! With that fire the grandfather started burning all the directions. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)