Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.256.14: हे धर्म से कभी विचलित न होने वाले राजा! उस समय ऐसा कोई छोटा-सा स्थान भी नहीं बचा था जो प्राणियों से भरा न हो। सम्पूर्ण त्रिलोकी अवरुद्ध हो गई। लोगों के लिए कहीं भी साँस लेना असम्भव हो गया - सबका दम घुटने लगा॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न ह्यन्तरमभूत् किञ्चित् क्वचिज्जन्तुभिरच्युत।
निरुच्छ्वासमिवोन्नद्धं त्रैलोक्यमभवन्नृप॥ १४॥
अनुवाद
हे धर्म से कभी विचलित न होने वाले राजा! उस समय ऐसा कोई छोटा-सा स्थान भी नहीं बचा था जो प्राणियों से भरा न हो। सम्पूर्ण त्रिलोकी अवरुद्ध हो गई। लोगों के लिए कहीं भी साँस लेना असम्भव हो गया - सबका दम घुटने लगा॥14॥
O King who never deviates from his Dharma! At that time, there was not even a small place left that was not filled with living creatures. The entire Triloki (world) was blocked. It became impossible for people to breathe anywhere - everyone started suffocating.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥