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mahabharat 12.256.13: जब महाबली पितामह ब्रह्माजी ने संसार की रचना करते समय बहुत से प्राणियों की रचना की, तो उनकी संख्या इतनी बढ़ गई कि ब्रह्माजी इतने लोगों का अस्तित्व सहन न कर सके॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.256.13 
प्रजा: सृष्ट्वा महातेजा: प्रजासर्गे पितामह:।
अतीव वृद्धा बहुला नामृष्यत पुन: प्रजा:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जब महाबली पितामह ब्रह्माजी ने संसार की रचना करते समय बहुत से प्राणियों की रचना की, तो उनकी संख्या इतनी बढ़ गई कि ब्रह्माजी इतने लोगों का अस्तित्व सहन न कर सके॥13॥
 
When the mighty grandfather Brahma created so many creatures while creating the world, their number increased so much that Brahmaji could not bear the existence of so many people.॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)