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mahabharat 12.256.11: राजा के वचन सुनकर तपस्वी नारद ने उन्हें यह प्राचीन कथा सुनानी आरम्भ की, जिससे उनके पुत्र-वियोग के शोक का शमन हो गया।   |   mahabharat अध्याय 12.256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.256.11 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा नारदोऽथ तपोधन:।
आख्यानमिदमाचष्ट पुत्रशोकापहं तदा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
राजा के वचन सुनकर तपस्वी नारद ने उन्हें यह प्राचीन कथा सुनानी आरम्भ की, जिससे उनके पुत्र-वियोग के शोक का शमन हो गया।
 
On hearing the king's words, the ascetic Narada began narrating to him this ancient story, which would assuage his grief over the loss of his son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)