श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 256: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.256.10 
तस्मै स सर्वमाचष्ट यथावृत्तं जनेश्वर:।
शत्रुभिर्ग्रहणं संख्ये पुत्रस्य मरणं तथा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजा ने रणभूमि में शत्रुओं द्वारा अपने पकड़े जाने और पुत्र के मारे जाने का सारा समाचार नारदजी को विस्तारपूर्वक सुनाया॥10॥
 
The king narrated the entire news of his capture by the enemies in the battlefield and the death of his son to Naradji in full detail. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)