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mahabharat 12.255.7-8: शब्द, विशालता, छिद्रों वाला, किसी भौतिक पदार्थ द्वारा अवलम्बित न होना, किसी अन्य आधार पर आश्रित न होना, अव्यक्तता, विकारहीनता, क्रिया और अस्तित्व का अभाव अर्थात् श्रोत्र का कारण होना और विकार के अधीन होना - ये सब आकाश के गुण हैं। इस प्रकार पंचमहाभूतों के ये पचास गुण बताए गए हैं। 7-8॥   |   mahabharat अध्याय 12.255: पञ्चभूतोंके तथा मन और बुद्धिके गुणोंका विस्तृत वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 255: पञ्चभूतोंके तथा मन और बुद्धिके गुणोंका विस्तृत वर्णन  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  12.255.7-8 
आकाशस्य गुण: शब्दो व्यापित्वं च्छिद्रतापि च।
अनाश्रयमनालम्बमव्यक्तमविकारिता॥ ७॥
अप्रतीघातिता चैव भूतत्वं विकृतानि च।
गुणा: पञ्चाशतं प्रोक्ता: पञ्चभूतात्मभाविता:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
शब्द, विशालता, छिद्रों वाला, किसी भौतिक पदार्थ द्वारा अवलम्बित न होना, किसी अन्य आधार पर आश्रित न होना, अव्यक्तता, विकारहीनता, क्रिया और अस्तित्व का अभाव अर्थात् श्रोत्र का कारण होना और विकार के अधीन होना - ये सब आकाश के गुण हैं। इस प्रकार पंचमहाभूतों के ये पचास गुण बताए गए हैं। 7-8॥
 
Sound, vastness, having holes, not being supported by any physical substance, not being dependent on any other support, latentness, disorderlessness, absence of reaction and existence i.e. being the cause of the sense of hearing and being subject to distortion - all these are the qualities of the sky. In this way these fifty qualities of the five great elements have been described. 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)