Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.255.4: शीतलता, रस, गीलापन, तरलता, स्नेह (चिकनापन), कोमलता, जिह्वा, टपकना, ओले या बर्फ के रूप में जम जाना तथा पृथ्वी से उत्पन्न चावल-दाल आदि को घोल देना, ये सब जल के गुण हैं। ॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.255: पञ्चभूतोंके तथा मन और बुद्धिके गुणोंका विस्तृत वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शीतलता, रस, गीलापन, तरलता, स्नेह (चिकनापन), कोमलता, जिह्वा, टपकना, ओले या बर्फ के रूप में जम जाना तथा पृथ्वी से उत्पन्न चावल-दाल आदि को घोल देना, ये सब जल के गुण हैं। ॥4॥
Coolness, juice, wetness, fluidity, affection (slickness), gentleness, tongue, dripping, freezing in the form of hail or ice and dissolving rice and lentils etc. produced from the earth, all these are the qualities of water. ॥4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥