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mahabharat 12.255.3: स्थिरता, भारीपन, कठोरता, बीज उत्पन्न करने की शक्ति, गंध, विशालता, शक्ति, प्रभाव, स्थापना और धारण शक्ति - ये पृथ्वी के दस गुण हैं ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.255: पञ्चभूतोंके तथा मन और बुद्धिके गुणोंका विस्तृत वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 255: पञ्चभूतोंके तथा मन और बुद्धिके गुणोंका विस्तृत वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.255.3 
भूमे: स्थैर्यं गुरुत्वं च काठिन्यं प्रसवार्थता।
गन्धो गुरुत्वं शक्तिश्च संघात: स्थापना धृति:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
स्थिरता, भारीपन, कठोरता, बीज उत्पन्न करने की शक्ति, गंध, विशालता, शक्ति, प्रभाव, स्थापना और धारण शक्ति - ये पृथ्वी के दस गुण हैं ॥3॥
 
Stability, heaviness, hardness, power to germinate seeds, smell, vastness, power, impact, establishment and holding power – these are the ten qualities of the earth. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)