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युधिष्ठिर उवाच
कथं पञ्चगुणा बुद्धि: कथं पञ्चेन्द्रिया गुणा:।
एतन्मे सर्वमाचक्ष्व सूक्ष्मज्ञानं पितामह॥ ११॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! बुद्धि के गुण पाँच ही कैसे हैं? और पाँच इन्द्रियाँ भी तत्वों के गुण कैसे हो सकती हैं? कृपया मुझे यह सब सूक्ष्म ज्ञान बताइए॥ 11॥
Yudhishthira asked, "Grandfather! How come there are only five qualities of the intellect? And how can the five senses also be the qualities of elements? Please tell me all this subtle knowledge.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥