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mahabharat 12.254.6: लेकिन जो मूर्ख हमेशा फल के लालच में पेड़ पर चढ़ता है, वह पेड़ द्वारा ही मारा जाता है, जैसे कोई जहरीली गोली रोगी को मार देती है।   |   mahabharat अध्याय 12.254: कामरूपी अद्भुत वृक्षका तथा उसे काटकर मुक्ति प्राप्त करनेके उपायका और शरीररूपी नगरका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 254: कामरूपी अद्भुत वृक्षका तथा उसे काटकर मुक्ति प्राप्त करनेके उपायका और शरीररूपी नगरका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.254.6 
संरोहत्यकृतप्रज्ञ: सदा येन हि पादपम्।
स तमेव ततो हन्ति विषग्रन्थिरिवातुरम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
लेकिन जो मूर्ख हमेशा फल के लालच में पेड़ पर चढ़ता है, वह पेड़ द्वारा ही मारा जाता है, जैसे कोई जहरीली गोली रोगी को मार देती है।
 
But the fool who always climbs the tree in greed for its fruit is killed by the tree itself, just like a poisonous pill kills a patient.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)