Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.254.5: जो मनुष्य काम के बंधनों को तोड़ देता है और वैराग्य रूपी शस्त्र से काम के वृक्ष को काट डालता है, वह क्षुद्र और प्राणघातक दोनों प्रकार के दुःखों से पार हो जाता है॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.254: कामरूपी अद्भुत वृक्षका तथा उसे काटकर मुक्ति प्राप्त करनेके उपायका और शरीररूपी नगरका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य काम के बंधनों को तोड़ देता है और वैराग्य रूपी शस्त्र से काम के वृक्ष को काट डालता है, वह क्षुद्र और प्राणघातक दोनों प्रकार के दुःखों से पार हो जाता है॥5॥
The man who subdues the bonds of lust and cuts down the tree of lust with the weapon of dispassion, transcends both minor and mortal sorrows. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥