Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.254.14: उस समय आत्मा की शक्ति से संपन्न होते हुए भी विवेकशून्य होने के कारण रजोगुणजनित काम मन को सब ओर से घेर लेता है। तब काम से घिरा हुआ मन रजोगुणरूपी काम से मित्रता स्थापित कर लेता है। तत्पश्चात् मन ही इन्द्रियरूपी प्रजा को रजोगुणजनित काम के हवाले कर देता है (जैसे राजा का विरोध करनेवाला मंत्री राज्य और प्रजा को शत्रु को सौंप देता है)।॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.254: कामरूपी अद्भुत वृक्षका तथा उसे काटकर मुक्ति प्राप्त करनेके उपायका और शरीररूपी नगरका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय आत्मा की शक्ति से संपन्न होते हुए भी विवेकशून्य होने के कारण रजोगुणजनित काम मन को सब ओर से घेर लेता है। तब काम से घिरा हुआ मन रजोगुणरूपी काम से मित्रता स्थापित कर लेता है। तत्पश्चात् मन ही इन्द्रियरूपी प्रजा को रजोगुणजनित काम के हवाले कर देता है (जैसे राजा का विरोध करनेवाला मंत्री राज्य और प्रजा को शत्रु को सौंप देता है)।॥14॥
At that time, the lust generated by Rajoguna surrounds the mind from all sides due to being devoid of discrimination despite being endowed with the power of the soul. Then the mind surrounded by lust establishes friendship with the lust in the form of Rajoguna. After that, the mind itself hands over the citizens in the form of senses to the lust generated by Rajoguna (like a minister opposing the king hands over the kingdom and the people to the enemy).॥14॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि शुकानुप्रश्ने चतुष्पञ्चाशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २५४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें शुकदेवका अनुप्रश्नविषयक दो सौ चौवनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥