प्रतिरूपं यथैवाप्सु ताप: सूर्यस्य लक्ष्यते।
सत्त्ववत्सु तथा सत्त्वं प्रतिरूपं स पश्यति॥ ३॥
अनुवाद
जैसे सूर्य की किरणें भिन्न-भिन्न जलाशयों के जल में पृथक-पृथक दिखाई देती हैं, वैसे ही योगी समस्त जीव-शरीरों के भीतर सूक्ष्म रूप में स्थित पृथक-पृथक जीवों को देखता है ॥3॥
Just as the sun's rays are seen separately in the water of different reservoirs, in the same way a yogi sees the separate living beings present in the subtle form within all the living bodies. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥